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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

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         अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

विश्व योग दिवस
योग के अंतरराष्ट्रीय दिवस को विश्व योग दिवस भी कहते है। 11 दिसंबर 2014 को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रुप में 21 जून को संयुक्त राष्ट्र आम सभा ने घोषित किया है। भारत में योग लगभग 5,000 हजार वर्ष पुरानी एक मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक प्रथा के रुप में देखा गया है। योग की उत्पत्ति प्राचीन समय में भारत में हुयी थी जब लोग अपने शरीर और दिमाग में बदलाव के लिये ध्यान किया करते थे। पूरे विश्वभर में योग अभ्यास की एक खास तारीख की और योग दिवस के रुप में मनाने की शुरुआत भारतीय प्रधानमंत्री के द्वारा संयुक्त राष्ट्र आम सभा से हुयी थी।
सभी के लिये योग बहुत ही जरुरी है और अगर इसे सुबह-सुबह रोजाना करें तो ये सभी के लिये फायदेमंद साबित होगा। इसका आधिकारिक नाम यूएन अंतरराष्ट्रीय योग दिवस है और इसे योगा दिवस भी कहा जाता है। योग, ध्यान, बहस, सभा, चर्चा, विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति आदि के माध्यम से सभी देशों के लोगों के द्वारा मनाये जाने वाला ये एक विश्व स्तर का कार्यक्रम है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2017 (विश्व योग दिवस)

विश्व योग दिवस या योग का अंतरराष्ट्रीय दिवस पूरे विश्व भर के लोगों के द्वारा 21 जून, बुधवार को 2017 को मनाया जायेगा।

विश्व योग दिवस का इतिहास

2014 में 11 दिसंबर को संयुक्त राष्ट्र आम सभा के द्वारा हर वर्ष 21 जून को योग का अंतरराष्ट्रीय दिवस या विश्व योग दिवस के रुप में पूरे विश्वभर में योग दिवस को मनाने के लिये घोषित किया गया था। यू.एन. आम सभा के अपने संबोधन के दौरान 2014 में 27 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र आम सभा में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा आह्वान के बाद योग दिवस मनाने की घोषणा की गयी थी। पूरे विश्वभर के लोगों के लिये योग के सभी फायदों को प्राप्त करने के लिये अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रुप में हर वर्ष 21 जून को अंगीकृत करने के लिये संयुक्त राष्ट्र आम सभा से उन्होंने आह्वान किया था।
अपने भाषण के दौरान नरेन्द्र मोदी ने यू.एन. की आम सभा से कहा कि “योग भारतीय परंपरा का एक अनमोल उपहार है।” ये मस्तिष्क और शरीर की एकता को संगठित करता है; विचार और कार्य; अंकुश और सिद्धि; मानव और प्रकृति के बीच सौहार्द; स्वास्थ्य और अच्छे के लिये एक पूर्णतावादी दृष्टिकोण है। ये केवल व्यायाम के बारे में ही नहीं बल्कि विश्व और प्रकृति के साथ स्वयं एकात्मकता की समझ को खोजने के लिये भी है। अपनी जीवनशैली को बदलने और चेतना को उत्पन्न करने के द्वारा ये जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने में मदद कर सकता है। चलिये एक अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को अंगीकृत करने की ओर कार्य करें।
इतिहास में भारत के लिये अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की घोषणा एक महान क्षण है। संयुक्त राष्ट्र आम सभा के द्वारा विश्व योग दिवस के रुप में घोषणा करने के लिये इसने 3 महीनों से भी कम समय लिया। भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 27 सितंबर 2014 में इसके लिये आह्वान किया था जो अंतत: 11 दिसंबर 2014 में घोषित हो गया। इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था कि किसी देश के द्वारा दिये गये प्रस्ताव को यू.एन. के द्वारा मात्र 90 दिनों में ही लागू कर दिया गया हो। लोगों के स्वास्थ्य और भले के लिये पूरे विश्व भर के लोगों के लिये एक पूर्णतावादी दृष्टिकोण उपलब्ध कराने के लिये आम सभा के द्वारा वैश्विक स्वास्थ्य और विदेश नीति के तहत इस स्वीकृत प्रस्ताव को अंगीकृत किया गया है।
पूरे विश्वभर की मानव जनसंख्या के जीवनशैली के ज्ञान और सकारात्मक बदलाव के एक महान स्तर को उत्पन्न करने के लिये संयुक्त राष्ट्र आम सभा को संबोधित करने के दौरान योग के लिये खासतौर से एक दिन अंगीकृत करने के लिये भारतीय पी.एम. श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने विचार रखे। नकरात्मक जलवायु परिवर्तन के कारण गिरते स्वास्थ्य की समस्या से निपटने के लिये अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को अंगीकृत करने के लिये विश्व के नेताओं से मोदी ने आह्वान किया। खासतौर से, योग के अंतरराष्ट्रीय दिवस के लिये उन्होंने 21 जून की तारीख को व्यक्त किया क्योंकि दुनिया के बहुत सारे भागों में लोगों के लिये बड़े महत्व के साथ ही उत्तरी गोलार्द्ध में ये सबसे लंबा दिन है।

विश्व योग दिवस उत्सव

विभिन्न वैश्विक नेताओं के द्वारा योग के अंतरराष्ट्रीय दिवस के उत्सव को समर्थन प्राप्त है। इसे यू.एस.ए. चीन, कैनेडा आदि सहित 170 देशों से ज्यादा के लोगों के द्वारा मनाया जाता है। पूरे विश्व भर के आम लोगों के बीच योग के फायदों के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिये योगा प्रशिक्षण कैंपस, योगा प्रतियोगिता जैसे क्रिया-कलाप और बहुत सारी गतिविधियों के आयोजन के द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे मनाया जाता है। लोगों को ये बताने के लिये इसे मनाया जाता है कि नियमित योग अभ्यास बेहतर मानसिक, शारीरिक और बौद्धिक स्वास्थ्य की ओर ले जाता है। ये सकारात्मक रुप से लोगों की जीवनशैली को बदलता है और सेहत के स्तर को बढ़ाता है।
योग के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिये राष्ट्रीय प्राथमिकता के अनुसार उचित तरीके से योग के अंतरराष्ट्रीय दिवस को मनाने के लिये सभी सदस्य, पर्यवेक्षक राज्य, संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था संस्थान, दूसरे शैक्षणिक संस्थान, क्षेत्रीय संगठन, नागरिक समाज, सरकारी संगठन, गैर-सरकारी संगठन तथा व्यक्तिगत रुप से लोग इकट्ठा होते हैं।

विश्व योग दिवस का उद्देश्य

निम्न उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये योग के अंतरराष्ट्रीय दिवस को अंगीकृत किया गया है:
  • योग के अद्भुत और प्राकृतिक फायदों के बारे में लोगों को बताना।
  • योग अभ्यास के द्वारा लोगों को प्रकृति से जोड़ना।
  • योग के द्वारा ध्यान की आदत को लोगों में बनाना।
  • योग के समग्र फायदों की ओर पूरे विश्वभर में लोगों का ध्यान खींचना।
  • पूरे विश्व भर में स्वास्थ्य चुनौतीपूर्ण बीमारियों की दर को घटाना।
  • व्यस्त दिनचर्या से स्वास्थ्य के लिये एक दिन निकाल कर समुदायों को और करीब लाना।
  • वृद्धि, विकास और शांति को पूरे विश्वभर में फैलाना।
  • योग के द्वारा तनाव से राहत दिलाने के द्वारा खुद से उनकी बुरी परिस्थिति में लोगों की मदद करना।
  • योग के द्वारा लोगों के बीच वैश्विक समन्वय को मजबूत करना।
  • लोगों को शारीरिक और मानसिक बीमारियों के प्रति जागरुक बनाना और योग के माध्यम से इसका समाधन उपलब्ध कराना।
  • अस्वास्थ्यकर कार्यों से बचाना और बेहतर स्वास्थ को बनाने के लिये अच्छे कार्य को सम्मान और प्रचारित करना।
  • शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के उच्च स्तर का पूरी तरह से आनन्द लेने के लिये लोगों को उनके अच्छे स्वास्थ्य और स्वस्थ्य जीवन-शैली के अधिकार के बारे में बताना।
  • स्वास्थ्य की सुरक्षा और दीर्घकालिक स्वास्थ्य विकास के बीच संबंध जोड़ना।
  • नियमित योग अभ्यास के द्वारा सभी स्वास्थ्य चुनौतीयों से पार पाना।
  • योग अभ्यास के द्वारा लोगों के बेहतर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रचारित करना।




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शहीद के बेटे की दीपावली... -अनामिका जैन 'अम्बर'

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शहीद के बेटे की दीपावली...


अनामिका अम्बर का ये गीत हिन्दी काव्य मंचो पर बेहद पसंद किया गया है....। इस गीत पर अनेक नगरो में नाटिकाएं भी हुई हैं।
इस गीत में एक 8 साल का बेटा दीपावली के त्यौहार पर अपनी माँ से बार-बार प्रश्न करता है की माँ मेरे पिता जी अभी तक क्यों नही आए हैं...उसकी माँ को पता चलता है की उसका पति और उस बच्चे का पिता सीमा पर युद्ध के दौरान शहीद हो गया है....पर वो अपने बेटे से इस बात को नही कह पाती.....आइये पढ़ते हैं ह्रदय को झकझोर देने वाले इस गीत को....

चारो तरफ़ उजाला पर अँधेरी रात थी।
वो जब हुआ शहीद उन दिनों की बात थी॥
आँगन में बैठा बेटा माँ से पूछे बार-बार।
दीपावली पे क्यो ना आए पापा अबकी बार॥
माँ क्यो न तूने आज भी बिंदिया लगाई है ?
हैं दोनों हात खाली न महंदी रचाई है ?
बिछिया भी नही पाँव में बिखरे से बाल हैं।
लगती थी कितनी प्यारी अब ये कैसा हाल है ?
कुम-कुम के बिना सुना सा लगता है श्रृंगार....
दीपावली पे क्यों ना आए पापा.......................॥

बच्चा बहार खेलने जाता है...और लौट कर शिकायत करता है....

किसी के पापा उसको नये कपड़े लायें हैं।
मिठाइयां और साथ में पटाखे लायें हैं।
वो भी तो नये जूते पहन खेलने आया।
पापा-पापा कहके सबने मुझको चिढाया।
अब तो बतादो क्यों है सुना आंगन-घर-द्वार ?
दीपावली पे क्यों ना आए पापा.......................॥
दो दिन हुए हैं तूने कहानी न सुनाई।
हर बार की तरह न तूने खीर बनाई।
आने दो पापा से मैं सारी बात कहूँगा।
तुमसे न बोलूँगा न तुम्हारी मैं सुनूंगा।
ऐसा क्या हुआ के बताने से हैं इनकार
दीपावली पे क्यों ना आए पापा.......................॥





विडंबना देखिये....
पूछ ही रहा था बेटा जिस पिता के लिए ।
जुड़ने लगी थी लकडियाँ उसकी चिता के लिए।
पूछते-पूछते वह हो गया निराश।
जिस वक्त आंगन में आई उसके पिता की लाश।

वो आठ साल का बेटा तब अपनी माँ से कहता है....

मत हो उदास माँ मुझे जवाब मिल गया।
मकसद मिला जीने का ख्वाब मिल गया॥
पापा का जो काम रह गया है अधुरा।
लड़ कर के देश के लिए करूँगा मैं पूरा॥
आशीर्वाद दो माँ काम पूरा हो इस बार।
दीपावली पे क्यों ना आए पापा.......................॥

-अनामिका जैन 'अम्बर'
वैराग्य कुञ्ज, 349, सदर कबाडी बाज़ार,
मेरठ छावनी॥ उत्तर प्रदेश (भारत)


गुरुवचनों की माला:– Must Read 25 Vachan

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गुरुवचनों की माला:– Must Read 25 Vachan -सुमित्रा गुप्ता'सखी'


 1. भजन का उत्तम समय सुबह 3 से 6 होता है|
 2. 24 घंटे में से 3 घंटों पर आप का हक नही, ये समय गुरु का है | 
 3. कमाए हुए धन का 10 वा अंश गुरु का है. इसे परमार्थ में लगा देना चाहिए| 
 4. गुरु आदेश को पालना ही गुरु भक्ति है | गुरु का पहला आदेश भजन का है जो नामदान के समय मिला था | 5. 24 घंटों के जो भी काम, सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक करो सब गुरु को समर्पित करके करोगे तो कर्म लागू नही होंगे | अपने उपर ले लोगे तो पांडवों की तरह नरक जाने पड़ेगा, जो हो रहा है उसे गुरु की मोज समझो |


6. 24 घंटे मन में सुमिरन करने से मन और अन्तःकरण साफ़ रहता है. और गुरु की याद भी हमेशा रहेगी. यही तो सुमिरन है|
 7. भजन करने वालो को, भजन न करने वाले पागल कहते है | मीरा को भी तो लोगो ने प्रेम दीवानी कहा था | 8. कही कुछ खाओ तो सोच समझ कर खाओ, क्योंकि जिसका अन्न खाओगे तो मन भी वैसा ही हो जायेगा | मांसाहारी के यहाँ का खा लिए तो फिर मन भजन में नही लगेगा | “जैसा खाए अन्न वैसा होवे मन, जेसा पीवे पानी वैसी होवे वाणी.” 
 9. गुरु का आदेश, एक प्रार्थना रोज़ होनी चाहिए |
 10. सामूहिक सत्संग ध्यान भजन से लाभ मिलता है. एक कक्षा में होंशियार विद्यार्थी के पास बेठ कर कमजोर विद्यार्थी भी कुछ सीख लेता है, और कक्षा में उतीर्ण हो जाता है | 
 11. गुरु का प्रसाद यानी “बरक्कत” रोज़ लेनी चाहिए | 

 12. भोजन दिन में 2 बार करते हो तो भजन भी दिन में २ बार करना चाहिए, जिस दिन भजन न पावो उस दिन भोजन भी करने का हक नही |
 13. हर जीव में परमात्मा का अंश है इसलिए सब पर दया करो, सब के प्रति प्रेम भाव रखो, चाहे वो आपका दुश्मन ही क्यों न हो. इसे सोचोगे की मैं परमात्मा की हर रूह से प्रेम करता हूँ तो भजन भी बनने लगेगा | 
 14. परमार्थ का रास्ता प्रेम का है, दिमाग लगाने लगोगे तो दुनिया की बातो में फंस के रह जाओगे | 
 15. अगर 24 घंटो में भजन के लिए समय नही निकाल पाते हो तो इससे अच्छा है चुल्लू भर पानी में डूब मरो | 16. आज के समय में वही समझदार है जो घर गृहस्थी का काम करते हुए भजन करके यहाँ से निकल चले, वरना बाद में तो रोने के सिवाय कुछ नही मिलने वाला | 
 17. अपनी मौत को हमेशा याद रखो. मौत याद रहेगी तो मन कभी भजन में रुखा नही होगा. मौत समय बताके नही आएगी | 
 18. साथ तो भजन जायेगा और कुछ नही. इसलिए कर लेने में ही भलाई है, और जगत के काम झूंठे है | 
 19. नरकों की एक झलक अगर दिखा दी जाये तो मानसिक संतुलन खो बैठोगे. इसलिए तो महात्माओ ने बताया सब सही है. वो किसी का नुकसान नही चाहते | बात तो बस विश्वास की है |
 20. भोजन तो बस जीने के लिए खाओ. खाने के लिए मत जीवो. भोजन शरीर रक्षा के लिए करो | 
 21. परमार्थ में शरीर को सुखाना पड़ता है मन और इन्द्रियों को वश में करना पड़ता है जो ये करे वही परमार्थ के लायक है |
 22. अपने भाग्य को सराहो कि आपको गुरु और नामदान मिल गये, जब दुनिया रोती नजर आएगी तब इसकी कीमत समझोगे | 
 23. किसी की निंदा मत करो वरना उसके कर्मो के भार तले दब जाओगे. क्यों किसी के कर्मों के लीद का पहाड़ अपने सर पर ले रहे हो | 
 24. भजन ना बनने का कारण है गुरु के वचनों का याद न रहना, गुरु वचनों को माला की तरह फेरते रहो जैसे एक कंगला अपनी झोली को बार बार टटोलता है | 
 25. इस कल युग में तीन बातो से जीव का कल्याण को सकता है. एक सतगुरु पूरे का साथ, दूसरा साधु की संगत और तीसरा “नाम” का सुमिरन, ध्यान और भजन,बाकी सब झगड़े की बाते है इस वक्त में सिवाय इन तीन बातो के और कर्मो में जीव का अकाज होता है !!



कहानियां जो बदल दे जिंदगी MOTIVATIONAL HINDI KAHANI

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           कहानियां जो बदल दे  जिंदगी

प्रेरणादायक कहानी – MOTIVATIONAL HINDI KAHANI
क्या आपको पता है, जब हाथी का बच्चा छोटा होता है तो उसे पतली एंव कमजोर रस्सी से बांधा जाता है| हाथी का बच्चा छोटा एंव कमजोर होने के कारण उस रस्सी को तोड़कर भाग नहीं सकतालेकिन जब वही हाथी का बच्चा बड़ा और शक्तिशाली हो जाता है तो भी उसे पतली एंव कमजोर रस्सी से ही बाँधा जाता है, जिसे वह आसानी से तोड़ सकता है लेकिन वह उस रस्सी को तोड़ता नहीं है और बंधा रहता है| ऐसा क्यों होता है?

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब हाथी का बच्चा छोटा होता है तो वह बार-बार रस्सी को छुड़ाकर भागने की कोशिश करता है, लेकिन वह कमजोर होने के कारण उस पतली रस्सी को तोड़ नहीं सकता और आखिरकर यह मान लेता है कि वह कभी भी उस रस्सी को तोड़ नहीं सकता| हाथी का बच्चा बड़ा हो जाने पर भी यही समझता है कि वह उस रस्सी को तोड़ नहीं सकता और वह कोशिश ही नहीं करता| इस प्रकार वह अपनी गलत मान्यता अथवा गलत धारणा (Wrong Beliefs) के कारण एक छोटी सी रस्सी से बंधा रहता है जबकि वह दुनिया के सबसे ताकतवर जानवरों में से एक है|
 दोस्तों वैज्ञानिकों के अनुसार भौंरे का शरीर बहुत भारी होता है| इसलिए विज्ञान के नियमो के अनुसार वह उड़ नहीं सकता| लेकिन भौंरे को इस बात का पता नहीं होता एंव वह यह मानता है की वह उड़ सकता है| इसलिए वह लगातार कोशिश करता जाता है और बार-बार असफल होने पर भी वह हार नहीं मानता क्योंकि वह यही सोचता है कि वह उड़ सकता है| आखिरकार भौंरा उड़ने में सफल हो ही जाता है|
दोस्तों इस जीवन में नामुनकिन कुछ भी नहीं (Nothing is impossible in life), नामुनकिन शब्द मनुष्य ने ही बनाया है| जब टेलीफोन और रेडियो आदि का आविष्कार नहीं हुआ था तो दुनिया और विज्ञान यही मानते थे कि आवाज को कुछ ही समय में सैकड़ो किलोमीटर दूर पहुँचाना नामुनकिन (Impossible) है, लेकिन आज मोबाइल हमारे जीवन का हिस्सा है|
इसी तरह जब तक विमान का आविष्कार नहीं हुआ था तब तक विज्ञान जगत भी यही मानता था कि मनुष्य के लिए आकाश में उड़ना संभव नहीं लेकिन जब राइट बंधुओं ने विमान का आविष्कार किया तो यह असंभव”, “संभवमें बदल गया (Impossible becomes Possible)|
इसी तरह क्रिकेट की बात ले लीजिये वनडे क्रिकेट के इतने बड़े इतिहास में वर्ष 2010 तक एक भी दोहरा शतक नहीं लगा लेकिन वर्ष 2010 में सचिन तेंदुलकर के दोहरा शतक लगाने के 4-5 वर्षों में ही 7 और दोहरे शतक (Double Centuries) लग गए| क्या यह मात्र संयोग था? ऐसा क्यों हुआ?
ऐसा इसीलिए हुआ क्योंकि 2010 से पहले जब किसी ने दोहरा शतक नहीं लगाया था तो सभी की मानसिकता यही थी कि दोहरा शतक लगाना बहुत ही मुश्किल है| क्योंकि अभी तक इस रिकॉर्ड को किसी ने नहीं तोडा था तो यह नामुनकिन सा लगता था| लेकिन जब सचिन ने दोहरा शतक लगाया तो सभी की मानसिकता बदल गयी और यह लगने लगा कि दोहरा शतक लगाना मुश्किल है पर नामुनकिन नहीं|

इस दुनिया में नामुनकिन कुछ भी नहीं (Nothing is impossible in this world),“नामुनकिनहमारा भ्रम या गलत मान्यता है जो आख़िरकार गलत साबित होती है|

हम वो सब कर सकते है जो हम सोच सकते है और हम वो सब सोच सकते है जो आज तक हमने नहीं सोचा

हम गलत धारणाएँ (Wrong Beliefs) बना लेते है और हमें इसी कारण कोई कार्य मुश्किल या असंभव लगता है|
हम आज जो भी है वह हमारी सोच का ही परिणाम है| हम जैसा सोचते है, वैसा बन जाते है – (We become, what we think)| “असंभवया नामुनकिन” (Impossible) हमारी सोच का ही परिणाम है|
हमारे साथ वैसा ही होता है जैसा हम मानते है और विश्वास करते है|”

भौरा विज्ञान के नियमों के अनुसार उड़ नहीं सकता लेकिन वह मानता है कि वह उड़ सकता है इसलिए वह उड़ जाता है जबकि हाथी कमजोर रस्सी को आसानी से तोड़ सकता है लेकिन वह यह मानता है कि वह उस रस्सी को तोड़ नहीं सकता, इसलिए वह रस्सी को तोड़ नहीं पाता| |

यह हम पर निर्भर करता है कि हमें हाथी की तरह अपनी ही सोच का गुलाम रहना है या भौरे की तरह स्वतंत्रअगर हम मानते है और स्वंय पर यह विश्वास करते है कि हम कुछ भी कर सकते है तो हमारे लिए नामुनकिन कुछ भी नही———————————————————- Nothing Is Impossible.
by :-happy hindi website


विश्व रक्त दाता दिवस 2017

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              विश्व रक्त दाता दिवस 2017

               विश्व रक्त दाता दिवस 2017 की आप सभी को बधाई 


विश्व रक्त दाता दिवस का इतिहास

14 जून को पूरे विश्व के बहुत सारे देशों में लोगों के द्वारा हर वर्ष विश्व रक्त दाता दिवस मनाया जाता है। इसे हर वर्ष 14 जून को 1868 में पैदा हुए कार्ल लैंडस्टेनर के जन्मदिन पर मनाया जाता है। स्वस्थ व्यक्ति के द्वारा स्वेच्छा से और बिना पैसे के सुरक्षित रक्त दाता (इसके उत्पाद सहित) की जरुरत के बारे में लोगों की जागरुकता बढ़ाने के लक्ष्य से वर्ष 2004 में पहली बार इस कार्यक्रम को मनाने की शुरुआत की गयी थी। रक्त दाता इस दिन एक मुख्य भूमिका में होता है क्योंकि वो जरुरतमंद व्यक्ति को जीवन बचाने वाला रक्त दान करते हैं।
वर्ष 2004 में “विश्व स्वास्थ्य संगठन, अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस संघ तथा रेड क्रिसेंट समाज” के द्वारा 14 जून को वार्षिक तौर पर मनाने के लिये पहली बार इसकी शुरुआत और स्थापना हुयी। पर्याप्त रक्त आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिये सुरक्षित और बिना भुगतान वाले रक्त दाता, स्वेच्छा से रक्त-दान देने वाले को बढ़ावा देने, अपने बहुमूल्य कदम के लिये रक्त-दान करने वाले को धन्यवाद कहने के लिये पूरे विश्व के सभी देशों को प्रोत्साहित करने के लिये 58वें विश्व स्वास्थ्य सम्मेलन में 2005 में मई महीने में इसके 192 सदस्य राज्यों के साथ डबल्यूएचओ के द्वारा विश्व रक्त दाता दिवस की आधिकारिक रुप से स्थापना की गयी थी।
कार्ल लैंडस्टेनर (एक महान वैज्ञानिक जिन्होंने एबीओ रक्त समूह तंत्र के अपने महान खोज के लिये नोबल पुरस्कार प्राप्त किया है) के जन्मदिवस को याद करने के लिये साथ ही साथ राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर इसको मनाने के लिये सभी रक्त दाताओं को एक अनमोल मौका प्रदान करने के लिये विश्व रक्त दाता दिवस लाता है।

विश्व रक्त दाता दिवस क्यों मनाया जाता है

पूरी दुनिया में कहीं भी जरुरतमंद व्यक्ति के लिये रक्त-आधान और रक्त उत्पाद आधान की जरुरत को पूरा करने के लिये विश्व रक्त दाता दिवस मनाया जाता है। ये अभियान हर साल लाखों लोगों की जान बचाता है और रक्त प्राप्त करने वाले व्यक्ति के चेहरे पर एक प्राकृतिक मुस्कुराहट देता है। रक्त-आधान लंबे और गुणवत्तापूर्ण जीवन जीने के लिये उन्हें प्रेरित करता है और कई प्रकार के स्वास्थ्य संबंधी जीवन से जुड़े खतरों से पीड़ित मरीज को मदद प्रदान करता है। ये पूरे विश्वभर में ढ़ेर सारी जटिल मेडिकल और सर्जिकल प्रक्रिया को सुलझा देता है। गर्भावस्था से पहले और बाद के दौरान महिलाओं का ध्यान रखने के लिये ये अभियान एक बड़ी जीवन बचाने वाली भूमिका निभाता है।
“अपने राष्ट्रीय रक्त सेवा, फ्रैंकाइस डू सैंग (इएफएस)” के माध्यम से फ्रांस के द्वारा विश्व रक्त दाता दिवस 2013 को मनाया गया था। फ्रांस 1950 से ही स्वैच्छिक और बिना भुगतान वाले रक्त-दान के प्रचार के कार्य में शामिल था। वर्ष 2013 के उत्सव का नारा था “जीवन को उपहार दो: रक्त-दान करें” जब मरीजों के लिये रक्त-दान के मूल्यों पर ध्यान केन्द्रित करते हुए इसने अपने 10वें वर्षगाँठ की घोषणा की थी।
दान दिये गये रक्त का इस्तेमाल गंभीर रुप से रक्त की कमी से जूझ रही महिला, बच्चे, दुर्घटना के दौरान अत्यधिक खून बह जाने के बाद पीड़ीत को, सर्जिकल मरीज को, कैंसर पीड़ीत को, थैलेस्सेमिया मरीज को, हिमोफिलीया से पीड़ीत लोग, लाल खून की कोशिका की कमी, खून की गड़बड़ी, खून का थक्के की गड़बड़ी से जूझ रहे लोगों को दिया जाता है।
उचित दान के लिये पर्याप्त रक्त के प्रबंधन के दौरान बहुत सारे जीवन के खतरों की चुनौतियों का सामना एक पर्याप्त रक्त आपूर्ति से रहित जगह करती है। खून की पर्याप्त आपूर्ति और इसके उत्पादों को स्व-प्रेरित, बिना भुगतान वाले और स्वैच्छिक रक्त दाताओं के द्वारा नियमित और सुरक्षित दान के द्वारा ही केवल पूरा किया जा सकता है।
विश्व रक्त दाता दिवस के कुछ उद्देश्यों को यहाँ नीचे दिया गया है:
  • 2020 तक पूरी दुनिया के स्वैच्छिक और बिना भुगतान वाले रक्त दाता से पर्याप्त रक्त आपूर्ति को प्राप्त करने का लक्ष्य विश्व स्वास्थ्य संगठन का है।
  • आँकड़ों के अनुसार, ये ध्यान देने योग्य है कि स्वैच्छिक और बिना भुगतान वाले रक्त दाताओं से पर्याप्त रक्त आपूर्ति केवल 62 देश ही प्राप्त कर रहें हैं जबकि 40 देश अभी भी मरीज के पारिवारिक सदस्य या पैसे से दान देने वालों पर खून देने के लिये निर्भर है। पूरे विश्व के बचे हुए देशों में स्वैच्छिक रक्त दाताओं को प्रोत्साहित करने के लिये इसे मनाया जाता है।
  • रक्त प्राप्तकर्ता के लिये रक्त दान क्रिया को एक अनमोल उपहार और नया जीवन पाना है।
  • लोगों की कहानियों को सभी देशों में दर्शाने के साथ बहुत सारी गतिविधियों को आयोजित करने के द्वारा डबल्यूएचओ ये अभियान चलाता है जिसे अपने दिल की धड़कन को जारी रखने के लिये तुरंत रक्त दान की जरुरत होती है।
  • पूरे विश्वभर में लाखों जीवन बचाने के लिये स्वैच्छिक और बिना भुगतान वाले रक्त दाताओं को धन्यवाद कहने के लिये इसे मनाया जाता है।
  • पूरे विश्वभर में 100% स्वैच्छिक और बिना भुगतान वाले रक्त दाताओं की जरुरत को पूरा करने के लिये इसे मनाया जाता है।
  • माताओं और बच्चों के जीवन को बचाने के लिये सुरक्षित रक्त दान के लिये रक्त दान करने वालों को प्रेरित करने के लिये इसे मनाया जाता है।
  • अपर्याप्त रक्त की आपूर्ति के कारण मृत्यु-दर को कम करने के लिये इसे मनाया जाता है। लगभग 800 महिलाएँ की कुपोषण गर्भावस्था, बच्चे के जन्म से संबंधित जटिलताओं, बच्चे के जन्म के दौरान अत्यधिक रक्तस्त्राव आदि के कारण मौत हो जाती है।
  • रक्त आधाव सेवाओं को मजबूत करने के लिये शिक्षण कार्यक्रम और अभियानों के द्वारा स्वैच्छिक रक्त दाताओं को प्रोत्साहित करना।

विश्व रक्त दाता दिवस कैसे मनाया जाता है

पूरे विश्वभर में रक्त दान के महत्व के साथ ही साथ सुरक्षित रक्त आधान की जरुरत के लिये लोगों को जागरुक बनाने के लिये हर वर्ष विश्व रक्त दाता दिवस को मनाया जाता है। इसे मनाने के लिये राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ढ़ेर सारी क्रिया-कलाप और कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।
स्वास्थ्य देख-भाल संगठन जैसे “विश्व स्वास्थ्य संगठन, रेड क्रॉस अंतरराष्ट्रीय संघ और रेड क्रीसेंट समाज (आईएफआरसी), रक्त दाता संगठन का अंतरराष्ट्रीय संघ (आईएफबीडीओ) और रक्त आधान का अंतरराष्ट्रीय समाज (आईएसबीटी)” वैश्विक स्तर पर लोगों को प्रोत्साहित करने के लिये तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करने के लिये एक-साथ काम करती हैं।
बहुत वर्षों से यूरोप के परिषद के द्वारा अभियान को मनाने की तैयारी की जाती है। पूरे विश्वभर में लगभग 92 मिलियन लोगों के द्वारा रक्त दान करने के बावजूद सुरक्षित रक्त आधान की जरुरत दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। सार्वजनिक स्थलों, स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और दूसरे शैक्षणिक संस्थानों में क्रिया-कलापों में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन, सभा, परिचर्चा, बहस, प्रश्न-उत्तर प्रतियोगिता, समाचार पत्रों में संबंधित लेखों और कहानियों का प्रकाशन, वैज्ञानिक सम्मेलन, पूरे विश्वभर में लेखों का प्रकाशन, अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक जर्नल, खेल क्रिया-कलाप और दूसरी विज्ञापन-संबंधी गतिविधियाँ शामिल रहती हैं।

विश्व रक्त दाता दिवस की थीम

  • विश्व रक्त दाता दिवस 2015 का थीम है “मेरा जीवन बचाने के लिये धन्यवाद।”
  • विश्व रक्त दाता दिवस 2014 का थीम था “माताओं को बचाने के लिये रक्त बचायें।”
  • विश्व रक्त दाता दिवस 2013 का थीम था “जीवन का उपहार दें:रक्त-दान करें।”
  • विश्व रक्त दाता दिवस 2012 का थीम था “हर खून देने वाला इंसान हीरो होता है।”
  • विश्व रक्त दाता दिवस 2011 का थीम था “अधिक रक्त, अधिक जीवन।”
  • विश्व रक्त दाता दिवस 2010 का थीम था “विश्व के लिये नया रक्त।”
  • विश्व रक्त दाता दिवस 2009 का थीम था “रक्त और रक्त के भागों का 100% गैर-वैतनिक दान को प्राप्त करना।”
  • विश्व रक्त दाता दिवस 2008 का थीम था “नियमित रक्त दें।”
  • विश्व रक्त दाता दिवस 2007 का थीम था “सुरक्षित मातृत्व के लिये सुरक्षित रक्त।”
  • विश्व रक्त दाता दिवस 2006 का थीम था “सुरक्षित रक्त के लिये विश्वव्यापी पहुँच को सुनिश्चित करने के लिये प्रतिबद्धता।”
  • विश्व रक्त दाता दिवस 2005 का थीम था “रक्त के आपके उपहार को मनायें।”
  • विश्व रक्त दाता दिवस 2004 का थीम था “रक्त जीवन बचाता है। मेरे साथ रक्त बचाने की शुरुआत करें।”

विश्व रक्त दाता दिवस पर कथन

  • “मैं 1980 से ही रक्त दान करने में शामिल हूँ क्योंकि इसकी नाजुक जरुरत है।”-डोन्ना रीड
  • “रक्त दाताओं के लिये मेरा जीवन आभारी है। मैं सदा उनका आभारी रहूँगा जिन्होंने मुझे खून दिया।”- निकी टेलर
  • “अधिक रक्त दाताओं की जरुरत के बारे में शब्द को फैलाना मेरा लक्ष्य है।”- निकी टेलर




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"प्रोफ़ेसर कमला कान्त तिवारी"

pratibha chayen buxar:-
प्यारे मित्रो--- "बक्सर को जानो" शीर्षक के माध्यम से संक्षिप्त "व्यक्तित्व परिचय" के क्रम में आज एक बार पुनः आप सबके बीच एक महान व्यक्ति का संक्षिप्त व्यक्तित्व परिचय लेकर हाजिर हु।
आज के "व्यक्तित्व परिचय" में:-------

                    "प्रोफ़ेसर कमला कान्त तिवारी"


यघपि कमला कान्त तिवारी जी बक्सर जिला के नहीं है, फिर भी जब बक्सर की चर्चा होती है तो कमला कान्त तिवारी जी का नाम स्वतः जुड़ जाता है।

के.के. तिवारी के नाम से मशहूर वरिष्ठ कांग्रेशि नेता कमला कान्त तिवारी जी का जन्म बिहार के कैमूर जिला के अंतर्गत रामगढ़ थाना के खोरहरा गाव में डा. बालक स्वामी तिवारी जी के यहाँ सन 2 फरवरी 1942 ई. को हुआ था।

प्रारंभिक शिक्षा गाव में प्राप्त करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए बनारस तथा बाद में पटना चले गए।
और यही पटना से अपने पुरुषार्थ तथा बुद्धि के बल पर पहली बार मशहूर हुए, पटना विश्वविद्यालय से राजनीती विभाग में पुरे विश्वविद्यालय में टॉप किये। और अपनी काबिलियत तथा प्रतिभा का लोहा मनवाया। और वही से राजनितिक जीवन का आगाज हुआ।

बक्सर लोकसभा सीट से पहली बार कांग्रेस के टिकट पर 1980 में अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कम्युनिस्ट पार्टी के सूरज प्रसाद जी को हरा कर विजय प्राप्त की।
दूसरी बार पुनः कांग्रेस के टिकट पर बक्सर लोकसभा से ही 1984 में चुनाव लड़े तथा अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कम्युनिस्ट पार्टी के तेजनारायण सिंह जी को हरा कर पुनः विजय प्राप्त की।

कांग्रेस पार्टी के गांधी नेहरू परिवार से इनका व्यक्तिगत घनिष्ट सम्बन्ध था। इनके अंदर विद्या, बुद्धि तथा तेज का प्रभाव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भारत की तरफ से संयुक्त राष्ट्र संगठन में जाकर भारत का प्रतिनिधित्व भी किये थे।
देश आजादी के बाद तथा अब तक के बक्सर के इतिहास में बक्सर से चुने हुए विभिन्न पार्टीयो से सांसदों के लिस्ट में एकमात्र "श्री कमला कान्त तिवारी जी ही भारत सरकार में केंद्रीय मंत्री के पद को शुशोभित किये है।(अभी तक बक्सर से भारत सरकार में कोई भी सांसद "श्री तिवारी" जी को छोड़कर केंद्रीय मंत्री नहीं रहा है)

प्रतिभा के धनि, प्रखर तथा मुखर वक्ता, श्री तिवारी जी ने दो पुस्तके भी लिखी है।
इनके बारे ऐसा कहा जाता है कि जब ये दिली से बक्सर की तरफ चलते थे तो नहरों में पानी, शहर में बिजली, इत्यादि जन सुविधा जनता को आसानी से तत्काल मुहैया हो जाती थी।

आज की तारीक में "श्री के.के. तिवारी" जी की तबियत वृद्धावस्था के कारण थोड़ी बहुत खराब रहती है। फिर भी पूरी तरह से चेतन अवस्था में है।सबको पहचान लेना, लोगो से समाचार पूछ लेना यहाँ तक सब कुछ ठीक है साथ ही प्रभु इन्हें दीर्घायु तथा स्वस्थ प्रदान करे।

आज की राजनीती में बक्सर कांग्रेस पार्टी से "श्री तथागत हर्षवर्धन" जी "श्री तिवारी" जी के सुपुत्र है, जो बक्सर कांग्रेस पार्टी के "जिलाध्यक्ष" है, तथा यह भी अपने पिता जी की ही तरह उच्च शिक्षा प्राप्त किये है तथा प्रतिभा के धनि व्यक्ति है।

2015 के बक्सर विधानसभा के कांग्रेस उम्मीदवार श्री संजय कुमार तिवारी उर्फ़ मुन्ना तिवारी जी को उस समय विवादों का सामना करना पड़ा था की, एक निजी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा कहा गया कि:---
"""संजय तिवारी उर्फ़ मुन्ना तिवारी पूर्व केंद्रीय मंत्री "श्री के.के. तिवारी" के सुपुत्र है, इसलिए उन्हें कांग्रेस पार्टी से बक्सर विधानसभा का टिकट दिया जाता है।
जो साक्ष्य के तौर पर आप तमाम दोस्तों के सामने भेज रहा हु:---
"24 oct 2015 (IANS)---Buxar has 29 candidates but the main fighters are BJP's Pradip Dubey, 44, and Congress' Sanjay Kumar Tiwari alias Munna Tiwari, 47, son of former union minister and Congress leader K.K. Tiwari.

.......प्रभाकर मिश्र......


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